बर्बरीक की धड़ की कहानी


बर्बरीक का धड़ हरियाणा के हिसार जिले के गांव स्याहड़वा (बीड़ गांव) में मिलता है, जहाँ श्याम बाबा का मंदिर है। बर्बरीक के बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था कि कलियुग में उनका शीश खाटू में और धड़ पृथ्वी पर रहेगा और उनकी पूजा की जाएगी। TeamJai Shree Shyam
बर्बरीक के धड़ की कहानी: #reelschallenge
1. मुगलों का हमला और स्वप्न:
1707 ईस्वी में, हिसार के गांव स्याहड़वा में मुगलों के शासनकाल के दौरान, गांव के मौलूराम और बिहारी मुंदलिया पर हमला हुआ। हमले की सूचना पर मौलूराम और पंडित मरडूराम जेल गए।
2. बर्बरीक का वरदान: #khatunaresh
जेल में पंडित मरडूराम को स्वप्न में बर्बरीक दिखाई दिए और उन्होंने बताया कि गांव में तालाब के बीच हींस (नीम) के पेड़ के नीचे उनकी धड़ की मूर्ति है।
3. मूर्ति का मिलना: #khatushyam
बर्बरीक ने मूर्ति के पूर्व दिशा में मंदिर बनाने को कहा और उन्हें जेल से रिहा करने का वचन दिया। अगली सुबह उन्हें रिहा कर दिया गया और उन्होंने मूर्ति ढूंढकर निकाली।
4. मंदिर की स्थापना: #खाटूश्याम
उस मूर्ति से छोटे-छोटे ईंटों का मंदिर बनाया गया, जिसे आज श्याम बाबा मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर में आज भी दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं।
 


Comments

Popular posts from this blog

खाटू श्याम जी के 11 नाम कौनसे हैं?

खाटू श्याम जी से प्रार्थना कैसे करें?